हम सबके दिमाग में कई ऐसी बातें  उठती हैं जो हमें हर दिन बताती हैं की क्या करना चाहिए और क्या नहीं और क्या सत्य है और क्या असत्य | माता-पिता, पति-पत्नी, भाई बहन, दोस्तों, साथियों, धार्मिक नेता , दुश्मन और समाज – सब यही हैं | कई बार वह हमारा भला चाहते हैं कई बार नहीं |

याद रखें की आप उन्हें बंद नहीं कर सकते , लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं है की आपको हर बार उनकी बात माननी पड़ेगी | जो आवाजें आपको ख़ुशी की तरफ ले जायें उनकी सुनें और बाकी सब को नज़रंदाज़ कर दें | 


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