बख्तियार खिलजी की मृत्यु (१२०६ ई.) के बाद अलीमर्दनबिहार का कार्यकारी शासक बना। इसके बाद हस्युयद्दीनइवाज खिलजी ने गयासुद्दीन तुगलक (१२०७-२७ ई.) के नाम से लखनौती में स्वतन्त्र सत्ता कायम की और १२११ ई. में हूसामुद्दीन ने गयासुद्दीन की उपाधि धारण की। वह तिरहुत राजा से नजराना वसूला करता था। इसके बाद इजाउद्दीन तुगरील तुगान खान (१२३३-४५ ई.) ने भी तिरहुत पर आक्रमण किया था। दिल्ली में इल्तुतमिश के सुल्तान बनने के बाद उसने बिहार पर विशेष ध्यान नहीं दिया लेकिन १२८५ ई. तक विशाल सएना लेकर बिहार की ओर चल पड़ा, उसने बिहार शरीफ एवं बाढ़ पर अधिकार कर लिया और लखनौती के आगे बढ़ा परन्तु राजमहल की पहाड़ियों में तोलियागढ़ी शासक इवाज की सेना से मुठभेड़ हुई उसने तुरन्त अधीनता स्वीकार कर आत्मसमर्पण कर दिया। इल्तुतमिश ने मालिकअलाउद्दीन जानी को बिहार में दिल्ली के प्रथम प्रतिनिधि के रूप में नियुक्‍त किया, परन्तु शीघ्र ही इवाज ने उसकी हत्या कर दी। इसके बाद इल्तुतमिश का पुत्र नसीरुद्दीन महमूदअन्त में वहाँ आया। बलबन की मृत्यु के बाद दिल्ली सल्तनत से बिहार पुनः स्वतन्त्र हो गया।

ममलूक राजवंश के समय तुर्कों का मनेर, बिहार शरीफ के अलावा शाहाबाद (गया), पटना, मुंगेर, भागलपुर, नालन्दा, सासाराम एवं विक्रमशिला इत्यादि क्षेत्रों पर अधिकार रहा। परन्तु दक्षिण बिहार में तुर्कों का उतना प्रभाव क्षेत्रों पर अधिकार रहा। परन्तु दक्षिण बिहार में तुर्कों का उतना प्रभाव क्षेत्र नहीं रहा।

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